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चचेरे भाई से सीलपैक चूत का उद्घाटन करवाया
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दोस्तो, मैं हूं वृत्ति चौधरी.
मैंने आपको पहले भी पिछली कहानी
पशु चराते मिली पड़ोसन कुंवारी लड़की की सीलपैक चूत
में बताया था कि मेरा उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ इस साइड पर एकदम असली कहानी लेकर आना है.
वैसे मेरी खुद की तो इतनी कोई सेक्स कहानी है नहीं जो मैं रोजाना आपको सुनाऊं.
और ना मेरे पास इतनी कल्पना करने की शक्ति है कि मैं कल्पना में किसी से सेक्स करके आपको कहानी बता दूं!
तो मैंने यह तय किया कि क्यों न में अपनी मेरी सहेलियों की बहुत सेक्स कहानी को यहां इस साइट पर बताकर आपका मनोरंजन करूं.
वैसे मेरी स्कूल और कॉलेज की सहेलियां बहुत ही ज्यादा चुदक्कड़ थी.
मैंने सोचा क्यों ना मैं उनकी भी असली सेक्स कहानी आप लोगों तक पहुंचाऊँ कि कैसे उन्होंने किसी को पटाया और उसके लंड का मजा लिया था.
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आगे की कहानी आप सरोज कासवान से सुने जो उसने खुद मुझे टाइप करके भेजी है.
दोस्तो, मैं सरोज कासवान … आज मैं आपको मेरी असली हॉट वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स कहानी सुनाऊंगी.
वैसे तो मुझे इस वेबसाइट के बारे में ऐसी कोई जानकारी नहीं थी.
तो मैं आपका ज्यादा समय खराब नहीं करते हुए सीधे ही अपनी सेक्स कहानी पर आती हूँ.
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वैसे मेरी उम्र अभी 30 साल है. पर यह सेक्स कहानी आज से 9 साल पहले की हैं यानी मैं उस समय 21 साल की थी और मेरी छोटी बहन आरती उस समय 19 साल की थी.
मेरी शादी हुइ लगभग 6 साल हो गए.
लेकिन शादी से पहले ही हम दोनों बहनों ने सेक्स कर लिया था.
मैं बाड़मेर की ग्रामीण इलाके में रहती हूं और हम लोग दूर-दूर बसी ढाणियों के अंदर निवास करते हैं.
मेरे परिवार हम दो बहनें और एक भाई है भाई बड़ा है.
पापा बाहर जॉब करते हैं और मम्मी घर पर काम करती हैं.
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रात को साथ में सोती हुई भी एक दूसरी की चूत में अंगुली करती थी और बूब्स मसलती थी और एक दूसरे को घोड़ी बनाकर भी चोदती थी.
लेकिन कोई लड़का नहीं मिल रहा था चुदाई करवाने के लिए!
घर से दूर-दूर होने के कारण काफी डर भी रहता था.
हमारे से नजदीक घर मेरे चाचा का घर था जो लगभग 1 किलोमीटर दूर था.
चाचा के एक लड़का और एक लड़की थी. चाचा जी खुद टीचर हैं और चाची भी टीचर है.
मेरी और गोविंद की बहुत अच्छी दोस्ती थी.
हम बचपन में ही साथ खेलते थे, साथ पढ़ते थे और कभी-कभी मस्ती मजाक भी करते थे.
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यानी गोविन्द मेरा लाड़ला भाई था, मैं उसका बहुत ख्याल रखती थी, वो भी मेरा बहुत ख्याल रखता था.
जब भी मैं उसके घर जाती थी, हम दोनों साथ में ही खाना खाते थे. इतना लाड़ला वो अपनी सगी बहन का भी नहीं था जितना वो मेरा था.
वो कई बार मेरी गोदी में सिर रख कर सोता था!
और मेरी हर बात वो मानता था लेकिन कभी भी मेरे भी मन में उसके प्रति गलत ख्याल नहीं थे.
उस समय चुदाई करने को हम समझते नहीं थे, उसके प्रति उस ऐसा कोई ख्याल नहीं आया था.
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क्योंकि वो बहुत ज्यादा खूबसूरत था और उसकी गर्लफ्रेंड भी बहुत थी जिसकी वो काफी अच्छे से चुदाई करता था.
और अमीर परिवार से होने के कारण उसे पैसों की भी कोई दिक्कत नहीं थी.
गोविंद बहुत अच्छा और नेक दिल इंसान था, वह बहुत ही अच्छी और सहज भाषा में बात करता था.
उसकी वैसे 3/4 तो स्कूल समय में गर्लफ्रेंड थी लेकिन मैंने कभी उसे चोदते नहीं देखा था, मुझे भी किसी ने बताया था.
गोविंद की बहन मेरे साथ मेरी क्लास में ही पढ़ती थी और गोविंद 19 साल का था, वह मेरी छोटी बहन आरती के साथ पढ़ता था.
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दिन में मेरी मम्मी 12:00 बजे चली गई.
तब मैंने आरती से कहा- क्यों न अपन गोविंद को ही पटाकर उससे ही चुदाई करवा लें? और यह अब अच्छा मौका है.
तो आरती ने भी हां कर दी- तुम ही पटा लेना, मैं बाद में शामिल हो जाऊंगी इसमें. पहले उसको शक नहीं होना चाहिए.
आरती भी चुदाई के लिए तड़प रही थी पर कोई मौका नहीं मिल रहा था.
वैसे अब तीन-चार दिन गोविंद हमारे पास ही रहने वाला था.
इस कारण उस से दिन मैं भी गोविंद को पटाने की सोचने लगी.
गोविंद के आने से पहले मैंने टाइट जींस और टॉप पहना जिसमें बूब्स एकदम स्पष्ट दिखाई दे रहे थे.
और आरती ने भी सलवार और कुर्ता पहना था गुलाबी रंग का!
आरती की उम्र उस समय 19 साल थी और उसके बूब्स 28″ के कमर 26″ की और गांड 32″ की थी.
फिर मैंने उसे पानी पिलाया और आरती को चाय बनाने का बोल दिया.
आरती चाय बनाने चली गई.
फिर थोड़ी बहुत बातचीत हुई और मैं बेडरूम में चली गई.
वो भी वहीं आ गया और टीवी देखने लगा था.
हम दोनों आपस में बातें करने लगे.
काफी तेरे दर-उधर की बातें हुई.
मैं उसकी गोदी में सिर रख कर टीवी देख रही थी.
मैंने यह महसूस किया कि वो बार बार मेरे स्तनों की ओर देख रहा था. उसने एक दो बार टच भी किए थे लेकिन मैंने उसे कुछ नहीं कहा था.
फिर हमने खाना खाया, रात को 8:00 के आसपास हम सोने चले गए.
हम तीनों ही एक ही रूम में लेट गए.
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बीच के पलंग पर गोविंद, उसके दाहिनी तरफ चारपाई पर मैं और बाईं तरफ की चारपाई पर आरती सो गई.
लेकिन मैं और गोविंद अभी भी टीवी देख रहे थे इस कारण नींद नहीं आई थी.
गोविंद मेरी गोदी में सिर रख कर टीवी देख रहा था.
उसे वहीं पर नींद आ गई थी या फिर नींद का नाटक कर रहा था.
रात को सोते हुए मैंने जानबूझकर गोविंद के पैर पर अपना पैर रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगी.
उसकी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई या फिर उसने भी नींद में होने का नाटक किया था. पता नहीं चला.
फिर मैंने अपना हाथ उसके लंड पर रख दिया.
तो मैंने देखा कि उसका लंड खड़ा हुआ हुआ था
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इसका मतलब यह था कि उसके भी मन में जरूर कुछ न कुछ सेक्स वाली भावना है.
मैं धीरे धीरे उसके लंड पर हाथ फेरने लगी.
वो काफी बड़ा हो रहा था. लगभग 8 इंच मोटा और 3 इंच मोटा महसूस हो रहा था.
लगभग 10 मिनट बाद उसने भी मेरे बूब्स पर हाथ रख कर उसे मसलना शुरू किया.
वह भी अब जाग गया था.
ऐसा करते-करते उसने मेरी जींस के बटन खोलने की एक हाथ से कोशिश की.
लेकिन खुले नहीं.
तब मैंने सोचा कि क्यों न मैं खुद ही खोल दूं.
लेकिन इस तरह अचानक सामने नहीं!
तब मैंने करवट बदली.
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तो वह एकदम चौंक गया, उसे लगा कि शायद मैं जाग रही हूँ.
मैंने करवट बदल कर मेरी जींस के बटन खोले और जिप को भी नीचे खिसका दिया ताकि गोविंद को चूत तक जाने में आसानी हो.
उसने कहा- धीरे धीरे फेर!
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मैंने कहा- मेरे ऊपर ही आ जा!
फिर ऊपर आने के बाद मैंने उसकी पैन्ट और कमीज को उतार कर फेंक दिए.
और मैंने भी उसके लंड पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.
वो मुझे किस करने लगा, जोर-जोर से मेरे बूब्स मसलने लगा.
तब उसने मुझे पूछा- यह आरती जागेगी तो नहीं?
मैंने कहा- नहीं जागेगी लेकिन जाग गई तो कोई बात नहीं.
फिर धीरे-धीरे ऐसे करते-करते उसने मेरी टॉप को निकाल दिया और फिर मेरी ब्रा को भी निकाल कर फेंक दिया.
ऐसा करते-करते मैंने भी उसकी बनियान भी उतार दी और और उसने खड़े चड्डी उतार दी और पूरी तरह से नंगा हों गया.
फिर उसने मुझे भी पूरी तरह नंगी कर दिया.
अब हम दोनों पलंग पर एकदम पूरे नंगे थे जो हवस की एकदम प्यासे थे.
मुझे बहुत दर्द हुआ, मैंने उसे रुकने को कहा.
तो मेरे दर्द को महसूस करते हुए वह रुक गया.
और थोड़ी देर बाद उसने दूसरा झटका दिया जिससे 4 इंच लंड मेरे जिस्म के अंदरघुस गया.
फिर तीसरे झटके में पूरा लंड में चूत के अंदर समा गया और मेरी जोर से चीख निकल गई.
शायद आरती को भी आवाज सुन गई, वो आवाज सुनकर जाग गई लेकिन उसने सोने का नाटक किया क्योंकि उसे पता था कि आज की चुदाई का दिन आ गया है.
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थोड़ी देर बाद उसने दूसरे राउंड का सेक्स शुरू किया और मुझे जबरदस्त तरीके से चोदा.
इस बार मेरी चूत भी फच फच की आवाज कर रही थी.
उस रात उसने चार राउंड सेक्स किया और हम दोनों नंगे सो गए.
सुबह 5:00 बजे के आसपास आरती जाग गई और पशुओं का दूध निकालने के लिए घर से बाहर गई.
तब तक मेरी नींद खुल गई, मैंने गोविंद के लंड को मसल कर खड़ा किया और उस पर बैठकर उछलने लगी.
चुदाई के बाद मैंने चाय बनाई और हम तीनों ही नंगे बैठकर चाय पीने लगे.
और उसके बाद हम दोनों बहनों ने मिलकर खाना बनाया.
हम उस दिन पूरे दिन नंगे रहे थे.
गोविंद को अब वापस एनर्जी आ गई.
इस कारण हम दोनों उसके लंड के ऊपर बैठकर उछल कूद करने लगी.
इस तरह हमारा पहला दिन सेक्स करते हुए गुजर गया.
रात को भी हम नंगे सोए तथा जब भी मन करता तब वो हमें चोद देता.
फिर उसने हम दोनों को कहा- मुझे गांड भी मारनी है.
तो मैंने कहा- मार लो, कोई दिक्कत नहीं!
इस तरह चार दिन तक हमारे भाई ने हम दोनों बहनों की खूब गांड और चूत चोदी.
बहुत ही शानदार मजा आया.
उसके बाद 3 साल तक हम दोनों बहनों ने भाई से चूत और गांड मरा मरा कर दोनों छेद काफी बड़े करवा लिए.
लेकिन आरती ने शादी के बाद यह सब बंद कर दिया था.
वो अपने पति से ही चुदाई करवाती है.
मैं अब तो दो बच्चों की मां भी बन गई हूं.
लेकिन हमारा भाई और बहन का प्यार अभी भी वैसे ही है.
हमारे तीनों के अलावा हमारे इस सेक्स वाले रिश्ते को कोई नहीं जानता है.












